क्यों आती है सुनामी? एक महासागर वैज्ञानिक ने इन विनाशकारी तरंगों की भौतिकी की व्याख्या की है

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    15 जनवरी, 2022 को, टोंगा में हंगा टोंगा-हंगा हापई ज्वालामुखी फट गया, जिससे प्रशांत महासागर में सभी दिशाओं में सुनामी की लहरें उठनी शुरू हो गई।

    जैसे ही विस्फोट की खबर फैली, आसपास के द्वीपों और न्यूजीलैंड, जापान और यहां तक ​​कि यू.एस. वेस्ट कोस्ट जैसे स्थानों पर सरकारी एजेंसियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की।

    प्रारंभिक विस्फोट के लगभग 12 घंटे बाद ही, कुछ फुट ऊंची सुनामी लहरों ने कैलिफोर्निया तटरेखाओं को छुआ – ज्वालामुखी फटने की जगह से 5,000 मील से अधिक दूर।

    मैं एक भौतिक समुद्र विज्ञानी हूं जो समुद्र में लहरों और अशांत मिश्रण का अध्ययन करता है। सुनामी मेरे छात्रों को पढ़ाने के लिए मेरे पसंदीदा विषयों में से एक है क्योंकि समुद्र के माध्यम से वे कैसे आगे बढ़ती हैं इसका भौतिक अध्ययन एकदम सरल और सुरुचिपूर्ण है।

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    कैलिफ़ोर्निया में समुद्र तट से टकराने वाली कुछ फुट ऊंची लहरें भले उतनी विनाशकारी नहीं थीं, जितनी आम तौर पर सुनामी की लहरें होती हैं। अतीत में आई दुखद सुनामी, जिनकी फुटेज आपने देखी होगी, जैसा इनमें कुछ नहीं था। लेकिन सुनामी सामान्य लहरें नहीं होती हैं, आकार चाहे जो भी हो। तो सुनामी अन्य समुद्री लहरों से कैसे भिन्न है? उन्हें क्या उत्पन्न करता है? वे इतनी तेजी से कैसे यात्रा करती हैं? और वे इतनी विनाशकारी क्यों हैं?

    In this satellite image taken by Himawari-8, a Japanese weather satellite, and released by the agency, shows an undersea volcano eruption at the Pacific nation of Tonga Saturday, Jan. 15, 2022. An undersea volcano erupted in spectacular fashion near the Pacific nation of Tonga on Saturday, sending large waves crashing across the shore and people rushing to higher ground. (Japan Meteorology Agency via AP)

    गहरा विस्थापन

    अधिकांश लहरें समुद्र की सतह पर चलने वाली हवा द्वारा उत्पन्न होती हैं, यह ऊर्जा को स्थानांतरित करती है और पानी को विस्थापित करती है। यह प्रक्रिया लहरें बनाती है, जो आप हर दिन समुद्र तट पर देखते हैं।

    सुनामी की लहरें एक पूरी तरह से अलग तंत्र द्वारा बनाई जाती हैं। जब पानी के भीतर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन पानी की एक बड़ी मात्रा को विस्थापित करता है, तो उस ऊर्जा को कहीं जाना होता है – इसलिए यह तरंगों की एक श्रृंखला उत्पन्न करता है। हवा से चलने वाली लहरों के विपरीत जहां ऊर्जा समुद्र की ऊपरी परत तक ही सीमित होती है, सुनामी तरंगों की एक श्रृंखला में ऊर्जा समुद्र की पूरी गहराई में फैल जाती है। इसके अतिरिक्त, हवा से चलने वाली लहर की तुलना में इस प्रक्रिया में बहुत अधिक पानी विस्थापित होता है।

    इस फर्क को बेहतर तरीके से समझने के लिए उन लहरों में अंतर की कल्पना करें जो तब बनती हैं जब आप किसी स्विमिंग पूल की सतह पर फूंक मारते हैं, या तब जब कोई ऊंचाई से पानी में कूदता है। किसी के पानी में कूदने पर बहुत अधिक पानी विस्थापित होता है, इसलिए यह लहरों का एक बहुत बड़ा समूह बनाता है।

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    भूकंप आसानी से भारी मात्रा में पानी को हिला सकते हैं और खतरनाक सूनामी पैदा कर सकते हैं। पानी के नीचे भारी भूस्खलन के समय भी ऐसा ही होता है। टोंगा सुनामी के मामले में, ज्वालामुखी के बड़े पैमाने पर विस्फोट ने पानी को विस्थापित कर दिया। कुछ वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि विस्फोट से समुद्र के नीचे भूस्खलन भी हुआ जिसने बड़ी मात्रा में पानी में भारी हलचल मचाने में योगदान दिया। भविष्य के शोध यह पुष्टि करने में मदद करेंगे कि यह सच है या नहीं।

    सुनामी लहरें तेजी से सब ओर फैलती हैं

    सुनामी का कारण कोई भी हो, पानी के विस्थापित होने के बाद, लहरें सभी दिशाओं में बाहर की ओर फैलती हैं – उसी तरह जब एक पत्थर को एक शांत तालाब में फेंका जाता है।

    सुनामी लहरों में ऊर्जा चूंकि समुद्र के तल तक पहुंचती है, समुद्र तल की गहराई प्राथमिक कारक है जो यह निर्धारित करती है कि वे कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।

    सुनामी की गति की गणना करना वास्तव में काफी सरल है। आप बस समुद्र की गहराई को – औसतन 13,000 फीट (4,000 मीटर) – गुरुत्वाकर्षण से गुणा करें और वर्गमूल लें। ऐसा करने से आपको लगभग 440 मील प्रति घंटे (700 किलोमीटर प्रति घंटे) की औसत गति मिलती है। यह सामान्य तरंगों की गति से बहुत तेज है, जो लगभग 10 से 30 मील प्रति घंटे (15 से 50 किमी प्रति घंटे) तक हो सकती है।

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    इस समीकरण का उपयोग समुद्र विज्ञानी यह अनुमान लगाने के लिए करते हैं कि सुनामी कब दूर तटों पर पहुंचेगी। टोंगा में शुरुआती विस्फोट के 12 घंटे और 12 मिनट बाद, 15 जनवरी को सुनामी ने सांता क्रूज़, कैलिफ़ोर्निया तट को छुआ। सांता क्रूज़ टोंगा से 5,280 मील (8,528 किलोमीटर) दूर है, जिसका अर्थ है कि सुनामी ने 433 मील प्रति घंटे (697 किलोमीटर प्रति घंटे) की यात्रा की – समुद्र की औसत गहराई का उपयोग करके गणना की गई गति अनुमान के लगभग समान।

    भूमि पर विनाश

    सुनामी हवा से उठने वाली सामान्य लहरों की तुलना में दुर्लभ हैं, लेकिन वे अक्सर बहुत अधिक विनाशकारी होती हैं। 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी में 225,000 लोग मारे गए थे। 2011 में जापान में आई सुनामी में 20,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

    ऐसा क्या है जो सामान्य लहरों की तुलना में सुनामी को इतना अधिक विनाशकारी बनाता है? खुले समुद्र में, सुनामी लहरें छोटी हो सकती हैं और पानी की सतह पर चल रही एक नाव को भी शायद इसका पता न चले। लेकिन जैसे-जैसे सुनामी भूमि के पास आती है, समुद्र उत्तरोत्तर उथला होता जाता है और सभी तरंग ऊर्जा जो हजारों फीट गहरे समुद्र के तल तक फैली हुई है, संकुचित हो जाती है। विस्थापित पानी को कहीं तो जाना है और जाने का एकमात्र स्थान ऊपर है, इसलिए जैसे-जैसे वे किनारे पर पहुँचते हैं लहरें ऊँची और ऊँची होती जाती हैं।

    जब सुनामी तट पर पहुँचती है, तो वह सामान्य लहर की तरह टूटकर समाप्त नहीं होती है बल्कि पानी की एक विशाल दीवार बनकर भूमि को निगलती जाती है। यह ऐसा है जैसे समुद्र का स्तर अचानक कुछ फीट या उससे अधिक बढ़ जाए। यह बाढ़ और बहुत तेज धाराओं का कारण बन सकता है जो आसानी से लोगों, कारों और इमारतों को बहा ले जा सकता है।

    सौभाग्य से, सुनामी दुर्लभ हैं और उतने आश्चर्य की बात नहीं रह गई है, जितनी कभी थी। अब समुद्र के नीचे ऐसे उपकरणों की श्रृंखला है, जिसमें लगे सेंसर सुनामी को महसूस कर सकते हैं और सरकारी एजेंसियों को सुनामी के आने से पहले चेतावनी भेजने में सक्षम हैं।

    यदि आप एक तट के पास रहते हैं – विशेष रूप से प्रशांत महासागर पर जहां ज्यादातर सुनामी उठती है – उच्च भूमि पर जाने के लिए अपने सुनामी से बचने के मार्ग को जानना सुनिश्चित करें, और यदि आपको सुनामी चेतावनी मिलती है तो उसे जरूर सुनें।

    हंगा टोंगा-हंगा हापई ज्वालामुखी के विस्फोट ने मुख्य संचार केबल को तोड़ दिया जो टोंगा के लोगों को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

    सुनामी का विज्ञान भले आकर्षक हो, लेकिन ये गंभीर प्राकृतिक आपदाएँ हैं। टोंगा से अब तक केवल कुछ मौतों की सूचना मिली है, लेकिन बहुत से लोग लापता हैं और सुनामी से हुए नुकसान की सही सीमा अभी भी अज्ञात है।

    – सैली वार्नर, ब्रैंडिस यूनिवर्सिटी

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